धोनी को पवेलियन भेजने वाले जितेश शर्मा की कहानी

रणजी में मौका नहीं मिलने पर डिप्रेशन में गए ऑस्ट्रेलिया कोच ने पहचाना था हुनर

धोनी को पवेलियन भेजने वाले जितेश शर्मा की कहानी

PL में रविवार को CSK और PKBS के बीच हुए मुकाबले में गेम चेंजर बने विकेटकीपर बल्लेबाज जितेश शर्मा ने सबका दिल जीत लिया जितेश ने पहले 3 छक्के लगाकर तेज 26 रन बनाए फिर विकेट कीपिंग करते समय उन्हें ने राहुल चहर  की गेंद पर धोनी का कैच लपक लिया अंपायर ने आउट नहीं दिया तो कप्तान मयंक अग्रवाल से DRS लेने को कहा थर्ड एंपायर नहीं है रिप्लाई देखकर धोनी को जैसे ही आउट दिया पंजाब की जीत की तरह आसान हो गई

IPL  से पहले डिप्रेशन में चले गए थे


जितेश के छोटे भाई नितेश ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया IPL मेगा ऑक्शन से पहले  खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी मैच देश को विदर्भ की टीम से ड्रॉप कर दिया गया था जिसके बाद वह डिप्रेशन में चले गए थे IPL में का ऑप्शन में PKBS ने अपने साथ उन्हें जोड़कर उनके करियर को नई राह दिखाई मौका मिलने पर देश ने भी अपने खेल से सबको प्रभावित किया।
उन्होंने बताया कि जितेश ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन किया था पर रणजी में मौका नहीं मिला ऐसे में भाई को लगा कि उनका करियर अब खत्म हो गया है भाई को पिछले सीजन में भी सब कुछ ही मैचों में मौका मिला था वहीं इससे पहले 2016 में भी IPL में मुम्बई इंडियन के साथ जुड़े थे लेकिन 2018 में उन्हें मुंबई इंडियंस ने रिलीज कर दिया था उन्हें डेब्यू करने का मौका नहीं मिला।

2018 के बाद IPL में नहीं मिला खरीदार

2018 के बाद किसी फ्रेंचाइजी ने ही खरीदा ऐसे में भाई को लगा कि उनका करियर खत्म हो गया है वह निराश रहने लगे ऐसे में आईपीएल ऑक्शन में पंजाब किंग्स ने बेस प्राइस 20 लाख में खरीद कर उन्हें नई राह दिखाई भाई ने पंजाब सिंह से मौका मिलने पर साबित कर दिया कि उनका करियर खत्म नहीं हुआ है

14 की उम्र में ऑस्ट्रेलिया कोच ने दिया मौका साल 

नीतीश ने कहा कि भाई को मौका ऑस्ट्रेलिया क्रिकेटर माइकल क्लार्क ने पर्सनल कोच नील डी कोस्टा ने दिया। कोस्टा जब विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन की नागपुर स्थित क्रिकेट एकेडमी के हेड थे तब वह हर जिले में जाकर प्रतिभाओं का चयन कर रहे थे उन्होंने ही भाई को मौका दिया और विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन की एकेडमी के लिए चयन किया भाई ने उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंडर 16 ,अंडर-19 और रणजी ने विदर्भ की ओर से खेले

 स्कूल में बल्लेबाज के साथ कीपिंग करना शुरू किया

नीतीश ने कहा कि भाई गोल्डन किड्स इंग्लिश हाई स्कूल की टीम से खेलते हुए बैटिंग के साथ गेंदबाज भी करते थे जरूरत पड़ने पर वहां कीपिंग भी करते थे बाद में उन्होंने कीपिंग और बल्लेबाज पर ही फोकस किया और स्कूल टीम के नियमित की पर बन गए।

श्री हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल से क्रिकेट की शुरुआत की।

जितेश के छोटे भाई ने कहा कि उनके क्रिकेट करियर की शुरुआत अमरावती में स्थित हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल के क्लब से हुई वहां पर उन्होंने प्रोफेसर डॉ दीनानाथ नवासे से क्रिकेट की ट्रेनिंग ली वैसे तो भाई गली मोहल्ले में शुरू से ही अन्य बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते थे उन्होंने खेलते हुए देखा देखकर पापा ने श्री हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल मैं भेजा ताकि उन्हें सही मार्गदर्शन मिल सके।

क्रिकेट के लिए 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ी

जितेश के छोटे भाई ने कहा कि भाई ने क्रिकेट के लिए 12वीं तक पढ़ने के बाद आगे की पढ़ाई छोड़ दी अपना पूरा फोकस क्रिकेट पर ही किया

मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के

नितेश ने कहा कि मेरे पापा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से हैं जबकि मां अमरावती की है हम दोनों भाई का जन्म अमरावती में हुआ पापा भी 16 साल की उम्र में अमरावती में ही रह रहे पापा का बिजनेस था

कहां पर बच्चों को क्रिकेट एकेडमी के लिए भेज सकते हैं

अमरावती ने हनुमान प्रसारक मंडल के खेल सेंटर के अलावा अपने बच्चों को संत गजानन क्रिकेट एकेडमी और श्री क्रिकेट एकेडमी में भी नहीं सकते हैं